Tuesday, November 22, 2011

अब तू सोजा !!!!


ज़िन्दगी मेरी है एक खाली किताब,
उसे है अब मुझीको भरना !
सोकर ज़िन्दगी जी लू ,
सुभे उटकर है मुझीको मरना !
दिन कटे, रातें बीत गयी,
दुनिया मेरी दो हिस्सों में बट गयी !
हर दिन अब एक नया जंग सा लग रहा है,
सो जा ऐ मन क्यों कम्बक्थ तू जग रहा है !
अब यह दर्द मुझसे सहा नहीं जाता,
पर किसी से भी कुछ कहा नहीं जाता !
  कठिनाई क्या होती है इसका तुझे अब एहसास हो रहा है ,
  माँ की बातें ना सुनकर अब तू रोहा है !
  उठ जा नींद से अब नहीं हुई है देर,
  कठिनाई तुझे नहीं, अब तू ले उनको घेर !
  अफ़सोस ना कर बीती बातों की,
  चल, दौड़, आगे तू बढ़ ,
  कमज़ोर नहीं है तू, मुश्किलों से लेगा तू लड़ !
  मेहनत कर रास्ता खुद बखुद दिखाई देगा,
  फिर तू ज़िन्दगी की नहीं, वोह तेरी बातें करेगा !
 कल का दिन मेरा एक नया शुरुआत होगा,
माफ़ कर दे ए मन, थक गया होगा अब तू सोजा !!!

-राहुल.वि 

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